कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

क्यों कि हर एक पल ज़रूरी होता है

15.11.2011
रोचक विषय कि यदि आपको 2 घंटे अतिरिक्त मिल जायें तो आप क्या करेंगें। पिछले कई दिनों से यही सोच रहे हैं कि आखिर करेंगें क्या? क्योंकि जबतक आपको कोई चीज़ न मिले आपकी चाहत,उत्सुकता सब बरकरार रहती है और आप ये भी सोचते हैं कि हम ये करेंगे,ऐसा होगा आदि-आदि किंतु जब आपको चाहा मिल जाता है तो सच है कि कई बार समझ ही नहीं आता कि हमें करना क्या है और कुछ ऐसा ही ऑफर है ये। सच कहे तो अच्छी अनुभूति है जो चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेर रही है और साथ ही स्वयं से पूछताछ भी चल रही है कि वाकई हम करेंगें क्या??? यही सोच कर आज….टिंगं टॉंग-टिंगं टॉंग..,शायद कोई आया है अतः लेखनी को यहीं अर्ध विराम दे रही हूँ!
16.11.2011
आज दूसरा दिन है और कोशिश है कि दिल से कुछ लिख सकूं। यूँ तो हमें कविता लिखना बहुत पसंद है खासकर जब हम खुश हों,परेशान हों,उदास हों या दुखी या कोई और इन पलों से गुज़र रहा हो । उस वक्त ह्रदय के भाव स्वतः ही शब्द रूप धर मुखर हो उठते हैं चाहे कितनी ही थकान हो या तनाव, लिखने के बाद सब छू मंतर हो जाता है। जीवन की भागदौड़ में समयाभाव सभी को सताता है क्यों कि अधिकाधिक कार्यों को करना,समय सदा कम ही लगता है। जब चाहे जो आज़मा ले अनेकानेक सवालों का जवाब एक ही मिलेगा कि “समय ही नहीं मिलता” जीवन की व्यस्तताओं में सभी जकड़े हुए हैं। ऐसे में यदि हमें पूरे 2घंटे अधिक मिल जाएं तो यकीन जानिए ये किसी लॉटरी निकलने से कम नहीं होगा। हमारा मानना है कि’समय ही समय है समय का’। यदि आप हमें अतिरिक्त दो घंटे दे हे हैं,वह समय हम अपनी लेखनी के लिए ही चुनेंगें क्यों कि जीवन में सारी ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हुए यदि कभी…टिंगं टॉंग-टिंगं टॉंग..,शायद कोई फिर आया है दरवाज़े की घंटी पुनः बज ही गई..
17.11.2011
यदि कभी समय की कमी महसूस होती है तो वह अपने लेखन के प्रति। अतः शायद नहीं,यकीनन यदि हमें दो घंटे अतिरिक्त मिल सकें तो वो समय हमारे लेखन या पठन के लिए ही होगा। ये पोस्ट हमने तीन दिन में पूरी की है जब कि लिखा कुछ खास नहीं है बस अपने समयाभाव को दर्शाया है जो कि स्वतः ही दिख रहा है परंतु अतिरिक्त दो घंटे मिलने के अनुभव मात्र से जो खुशी हो रही है उसके लिए ‘सर्फ ऐक्सल’ का दिल से धन्यवाद।
नवम्बर 16, 2011 

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