कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday, 29 January, 2012

तुम्ही हो मेरा जीवन

तुम्ही हो मेरा जीवन
तु्म्हारे लिए तन-मन
करे इंतज़ार सदा तेरा प्यार
लाए खुशियाँ ढेर मेरे मन में
जाऊँ वार-वार करूं तुझसे प्यार
है ऐतबार तुझमें
करके श्रंगार मन में है प्यार
सब वार दूं मैं तुझपे
कुमुकुम तरंग,मेंहदीं का रंग
फैली है सुगंध मन में
पूजूं चाँद संग तुझे मैं अखण्ड
तेरी साँसों में हर सिंगार
लूं लाख जन्म चाहूँ तेरा संग
न और कुछ जीवन मे
तुम्ही हो मेरा जीवन
तु्म्हारे लिए तन-मन…

करवा चौथ की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ…
अक्टूबर 15, 2011 

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