कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

शायराना अंदाज़-4

“तुझसे प्यार तो नहीं,फिर ये दर्द क्यों है
है रोज़ की ख़बर,फिर फ़िक्र क्यों है
समझ नहीं आता सुनूं तुझे,या तेरी खा़मोशी को
तू कहता कुछ,खा़मोशी का सबब कुछ और क्यों है”
अक्टूबर 30, 2011

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