कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Tuesday, 31 January, 2012

फासला उम्र का

फासला उम्र का दिख जाता है बस यूँ ही
विचारों के फासले की उम्र नहीं दिखती
फिर भी सदा उम्र से विचारों को आँका जाता,
क्या अधिक उम्र से ही,जीवन दिख पाता?
सच है कि अनुभव सब सिखा जाता
हम सीखे हैं कितना,ये कौन जान पाता।
सीखने की चाह ही सदा जीत पाती
सोच का है फेर बस,समझ यही आता
विचारों की नदिया यूँ बहने को होती
किसी को माँझीं,किसी को मँझधार नज़र आता।
फासला उम्र का सदा दिख जाता…
जनवरी 13, 2012

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