कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

आज की सुबह

आज की सुबह कुछ खास तो नहीं
फिर भी था इंतजार सुबह होने का
न आए फिर कभी इतनी लम्बी रात
आओ छोड़ दें गहरी निद्रा का साथ
है सुबह नयी है दौर ये नया
नये हौसलों का फिर जन्म है हुआ
उम्मीदों को अपनी जगाना है अब
इक नया इतिहास बनाना है अब
है लंबा सफर न घबराना तुम
गुजरी हुई रात में फिर न जाना तुम
आज की सुबह साफ है बहुत
नये हौसलों का अहसास है बहुत
शायद तभी था इंतज़ार,सुबह का
इस रोशनी में जीना कुछ खास है
आज की सुबह इक नया आगाज़ है…

अगस्त 28, 2011

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