कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Tuesday 31 January 2012

शायराना अंदाज़-10

“इंतज़ार उनका,कुछ हुआ इस तरह
हो बेचैन रूह भी मचलने लगी,
हर लम्हे पे टिकी थी बेसब्र नज़र
हुआ हमें ,उन्हें दिललगी लगी।”
जनवरी 5, 2012 

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