कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

आज तुमने कह दिया

आज तुमने कह दिया
भावों पे नियंत्रण कर लिया
पर भला ये रोज कैसे,
हर दिन तो सूरज आएगा
भरपूर रोशनी लाएगा
हर दोपहर मुस्कुराएगी
हज़ारों बाते दुहराएगी
हर शाम यूँ तन्हा अकेला
खुशबू तो फैलाएगी बेला
हर रात्रि तारों से भरी
शीतल चाँदनी की माधुरी
सब तो आते हैं रोज़
फिर भला भावों पे रोक,
ये कैसा न्याय तुमने किया
करो भावों पे नियंत्रण कह दिया…

जुलाई 22, 2011

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