कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Tuesday 31 January 2012

स्वागत नव वर्ष का


नव वर्ष लेकर आ रहा
मन में नया सा हर्ष,
कैसे करें और क्या भला
छिड़ रहा यही संघर्ष।
दिल खुशी से झूमता,
स्वागत को ये आतुर
चहुँ ओर फैले नव किरण
चाहे यही दिवाकर।
सब का जीवन जगमगाए
नव ज्योति सा पावन
हो चाहतें भी सारी पूरी
न बचे कोई चुभन।
आओ मन में ठान लें अब
लें नया संकल्प,
सदभावना हो सबके लिए
न कोई और विकल्प।
नव वर्ष यूँ ही आएंगें
ले नित नये दिनमान
छोड़कर अभिमान हमें
रखना है सबका मान।
ह्रदय द्वार है खोलकर
करते हम स्वीकार
नव वर्ष आपके जीवन में
ले आए खुशियाँ अपार।
नये वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाओं एवं बीते वर्ष की मधु स्मृतियों के साथ आप सभी की,
इंदु     
दिसम्बर 30, 2011

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