कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Tuesday 31 January 2012

शायराना अंदाज़-11

“ख़ता ये हुई,तुम्हे खुद सा समझ बैठे
जबकि,तुम तो…
‘तुम’ ही थे”
जनवरी 20, 2012

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