कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

शायराना अदांज़-1

आसां न होगा राहे इश्क पे चलना
पर हो गया जब,फिर क्या गिला करना,
रोके कब रुका है राहगीरों के इश्क
गज़ब का अहसास है किसी से प्यार करना।

सितम्बर 24, 2011

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