कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday, 29 January, 2012

शायराना अंदाज़-5

“इश्क ने किया बेबस हमें इतना
न ख़बर हो तेरी,सुकूं मिलता ही नहीं
हौसलाए ख़्वाहिशों का आलम न पूछो
बिन तेरे दीदार,दिल लगता न कहीं”
नवम्बर 15, 2011

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