कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Tuesday 31 January 2012

शायराना अंदाज़-9

“तन्हाइयों की आदत अब हो गई हमें
तुम्हारा पास आना,अब भाता नहीं
यूं फैले हमारी चाहतों के फासले,
अब किसी चाहत से,कोई नाता नहीं”
दिसम्बर 17, 2011 

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