कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

शायराना अंदाज़-6

“न मिल कर सुकूं
न दूर जा कर ही,
इससे तो बेहतर था
बस ख़यालों में रहना”
नवम्बर 28, 2011

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