कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday, 29 January, 2012

प्यार एक भ्रम है


प्यार एक मात्र भ्रम है इससे अधिक कुछ नहीं,हाँ सभी को इसका अलग-अलग ग़ुमां ज़रूर होता है। कोई प्यार में बावरा हुआ जाता है कोई प्यार में खुद को तलाशता है। प्यार भी एक बार नहीं बार-बार होता है क्योंकि भ्रम जीवन में अनेकानेक बार होते ही हैं,या यूँ कह लें कि जीवन स्वयं ही भ्रम है तो भी कुछ अधिक न होगा। प्यार में जीने-मरने वाले भरे पड़े हैं और उन्हें आप गलत भी नहीं ठहरा सकते क्योंकि यही तो उनका भ्रम है और वो इससे ग्रसित। प्यार से बड़ा वायरस आज तक नहीं फैला जो दिखता तो नहीं लेकिन आपको कब डस लेता है आप समझ ही नहीं पाते। आप सही गलत सब प्यार की नज़र से देखते हैं और यही भ्रम आपको खोखला करता चला जाता है,पूरी तरह।
भ्रम हुआ,कि प्यार हुआ किंतु यही यदि दूसरे को नहीं हुआ तो भी मन दुखी और यदि हो गया तो फिर उसकी शिकायतों से दुखी। प्यार में यदि एक गुलाब भी मिला,दिल में पूरी क्यारी खिल जाती है और यदि नहीं तो बबूल के कांटे सीने पे बिछ जाते हैं। गज़ब का है ये भ्रम जो लोगों को कभी हँसाता-कभी रुलाता बल्कि एक कठपुतली सा नचाता है।
‘हमें तुमसे प्यार है,तुम न मिले हम जी न सकेंगे’ पर फिर भी जीते हैं और यदि तुम मिल गए तो पूरा जीवन कोसेंगे कि इससे तो बेहतर था हम मिलते ही नहीं,एक भ्रम तो रहता कि हम मिल न सके। प्रेम रूपी वायरस पहले आपको मज़बूत बनाने का भ्रम दिखाता है फिर धीरे-धीरे आपको अपने अधीन कर कमज़ोर करता जाता हैऔर आप फिर भी उसी भ्रम के पीछे भागते रहते हैं जिसका कोई अंत नहीं कोई वजूद नहीं। ‘प्यार बाँटते चलो’गाना सुनना अच्छा तो लगता है किंतु यथार्थ के धरातल पर सच्चाई से बहुत दूर क्योंकि किसी को भ्रमित करने से बेहतर होगा कि ‘ज़िंदगी जीते चलो’की तर्ज़ पर ही लोगों का हौसला बढ़ाया जाए।
“ऐ ज़िंदगी तेरे ग़म से डर लगता नहीं अब
बस ख़ुदा के लिए हमसे ‘प्यार’ मत करना।”दिसम्बर 11, 2011

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