कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday 29 January 2012

शायराना अंदाज़-3

“हम ही हम हैं तुम्ही तुम हो
वही दुनिया वही गम हैं
हमें क्या फ़िक्र जमाने की
हम ही तुम हो तुम्ही हम हैं”
“इश्क करने की वजह न पूछो कोई हमसे
बिना किसी वजह इश्क करते हैं हम
नफ़ा नुकसान का ये सौदा नहीं
फ़ेर है नज़र का,ऐतबार करते हैं हम”
अक्टूबर 19, 2011

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