कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Showing posts with label धड़कन. Show all posts
Showing posts with label धड़कन. Show all posts

Thursday, 9 February 2012

तुमसा न कोई

न मिला कोई तुम सा,पहले कभी
धड़कता है दिल पर धड़कन रुकी
जज़बात हैं यूँ सारे लफ्ज़ों मैं कैद
मिलेंगें जब हम,थम जायेगी घड़ी
वो सोचना तुम्हे यूँ भाने लगा
है तारों की दिल मे,वीणा बजी
अंगार से लब यूँ ग़रम हो गए
आँखों की चिलमन है खुद पे गड़ी
न ही सुनना है कुछ,न ही कहना तुमसे
ख़ामोशी भी दास्ताँ सुनाने लगी
तुम्हे हो तो हो,न हमें ये ख़बर
क्यूँ दिल की हर धड़कन तुम्हारी लगी।

Sunday, 29 January 2012

तुम्हारी याद भी हमदम

तुम्हारी याद भी हमदम
हमें हर पल सताती है
तुम्हारी चाह भी हमदम
हमें हर पल रुलाती है
तुम्हारे प्यार की खुशबू
ये सांसें चल ही जाती हैं
तुम्हारी सांसों की गरमी
हमें पिघला ही जाती है
तुम्हारी धड़कन की आवाज़
रूह में समा ही जाती है
क्यूँ इतना याद आते हो
जब कि हो नहीं तुम दूर
फिर भी प्यार बन कर तुम
हमें हर पल लुभाते हो
तुम्हारे हम सदा से हैं
यही धुन गुनगुनाती है
हमारे दिल की धड़कन भी
तुम्हे पहचान जाती है
कभी खुद से पूछना हमदम
धड़कन नाम किसका बताती है…

अगस्त 30, 2011