कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

Sunday, 29 January 2012

हिंदी दिवस

आओ मनाएँ मिलकर आज का ये दिन
सुंदर भावों से सजाएँ आज का ये दिन
मात्र भाषा रूप में मिली है हमको
हिंदी हमारा गर्व है न छोड़ेंगे इसको
लाख भाषाएं आएँ,आना उनका काम
हमें तो है यही प्यारी,यही हमारा मान
सभी भाषाओं का,करते हम सम्मान
पर हिंदी है सर्वोपरि यही हमारी शान
क्या हुआ गर अंग्रेज़ी का है बहुत नाम
वो भी तो एक भाषा है,है उसे सलाम
किंतु हिंदी आज भी,है हमारी पहचान
दूसरों का मान ये सिखाती है हमें
हर रूप में तभी ये भाती है हमें
सहर्ष हम आज करते हैं तुम्हें नमन
हो तुम्ही हमारी भाषा,हो तुम्ही हमारा वतन…

हिंदी दिवस पर हर्षित मन है आज,फिर क्यूं भला सोचें कुछ और हम आज…
सितम्बर 13, 2011

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