कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है…

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Sunday, 29 January 2012

ज़िंदगी के रंग कई

गिरगिट की तरह रंग बदलती है ज़िंदगी
बचपन की हरकतों का बयाना है ज़िंदगी
जवानी की धड़कनों का गुनगुनाना है ज़िंदगी
बुढ़ापे की रुकी सांसों का आना है ज़िंदगी
मौत को चुपके से बुलाना है ज़िंदगी
गम ए दिल का समंदर है ज़िंदगी
तिल-तिल कर हर रोज मिटाना है ज़िंदगी
हजार आँसुओं का आना है ज़िंदगी
हर नाम पर रहती तू कु्र्बान ए ज़िंदगी
ऐ जिंदगी तेरे ग़म से परेशान ए जिंदगी
तुझे समझ पाना है मुश्किल ए ज़िंदगी
हँसा कर रुलाना ही आदत है ज़िंदगी
एक खुशी देकर बहलाना है ज़िंदगी
हर रूप में एक नयी बसती है ज़िंदगी
नयी धड़कनों की आवाज़ है ज़िंदगी
हर सुबह एक नयी शुरुआत है ज़िंदगी
ऐ ज़िंदगी तू है बड़ी अजीब ज़िंदगी
तू ही बता क्या यही तेरा नाम ज़िंदगी…

अगस्त 23, 2011